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Sunday, May 31, 2020

मेरा कुछ बहुत कीमती खो गया है

मेरा कुछ बहुत कीमती खो गया है -२
कैसे मनाऊँ मैं दिल को, के दिल खो गया है |
बहुत प्यारा लगता था तेरा मुसकराना
ना जाने कहां वो हसी खो गयी है ||

वो नज़रों का मिलना
वो गालों पे लाली |
घूँघट के पीछे
शर्मो हया थी निराली ||

तस्वीर तेरी बनाई थी दिल में
रंगीन से ख्वाब पिरोए थे उसमें |
ये आज दिल में रंज है कैसा
ना जाने कहा वो छवि खो गयी है ||

मेरा कुछ बहुत कीमती खो गया है ..

यह ज़ील, यह अंबर, नदी का किनारा
पर्वत से टकरा, घटा (का) बरस जाना |
फ़िज़ा में नही अब वो मंज़र पुराना
किसीसे नही अब मेरा दोस्ताना ||

बेपरवाह राहों में साथ था तेरा
चलना, ठहरना, वो गिर के संभलना |
मंज़िल से आगे यूही निकलना
ना जाने कहा वो हमराह खो गया हैं ||

मेरा कुछ बहुत कीमती खो गया है ..
कैसे मनाऊँ मैं दिल को ..

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